
विश्व जनसंख्या दिवस (World Population Day) प्रत्येक साल 11 जुलाई को मनाया जाता है. विश्वभर में विश्व जनसंख्या दिवस हर साल 11 जुलाई को जनसंख्या के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है. इस दिन को मानाने का उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या को रोकने और इसके प्रति लोगों को जागरूक करना होता है.
चीन और भारत विश्व के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश हैं. इन दोनों देशों में पूरी विश्व की आबादी के तीस फीसदी से भी ज्यादा लोग रहते हैं. आज के समय में नाइजीरिया सबसे तेज गति से जनसंख्या वृद्धि करने वाला देश है. नाइजीरिया जनसंख्या के मामले में भले ही अभी 7वें नंबर पर है, लेकिन यह साल 2050 से पहले अमेरिका को पीछे छोड़ कर तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है. विश्व की एक बड़ी आबादी आज भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत मूल सुविधाओं से दूर है.
विश्व जनसंख्या दिवस मनाने की शुरुआत 11 जुलाई 1989 को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संचालक परिषद द्वारा हुई थी. उस समय विश्व की जनसंख्या लगभग 500 करोड़ थी. तब से प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को यह दिवस मनाया जाता है
विश्व जनसंख्या दिवस को पहली बार 11 जुलाई 1990 को 90 से अधिक देशों में चिह्नित किया गया था. तब से कई देश के कार्यालयों, अन्य संगठनों और संस्थानों ने सरकारों और नागरिक समाज के साथ साझेदारी में विश्व जनसंख्या दिवस मनाया.
इस वर्ष का विषय विशेष रूप से कोरोना महामारी के समय में दुनियाभर में महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और अधिकारों की सुरक्षा पर आधारित है. काम पर जाने वाली महिलाएं अक्सर असुरक्षित माहौल में काम करती हैं. विश्वभर में लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं अपने श्रम के माध्यम से अनौपचारिक रूप से अर्थव्यवस्था में योगदान देती हैं.
विश्व जनसंख्या दिवस भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्व की करीब साढ़े सात अरब आबादी में से करीब 130 करोड़ लोग भारत में रहते हैं. भारत की जनसंख्या वृद्धि की सही तरीके से बढ़ोतरी के लिए यह दिवस भारत के लिए महत्वपूर्ण है. भारत के लिए बढ़ती जनसंख्या एक बहुत बड़ी चुनौती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर भारत की जनसंख्या की वृद्धि दर कम नहीं हुई तो भारत दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएगा.